Chandrayaan 3 Big Update: चंद्रयान-3 में लगे ताकतवर कैमरे ने भेजी चौका देने वाला तस्वीर

Chandrayaan 3 Big Update आज उसने भेज भी दी. चंद्रयान-3 में लगे कैमरे बेहद ताकतवर हैं. लॉन्च के बाद लैंडर के एक कैमरे ने पृथ्वी की तस्वीर ली. फिर चांद के ऑर्बिट में जाते समय दूसरे कैमरे ने चांद की सतह की तस्वीरें लीं. आज आप धरती और चंद्रमा की पहली तस्वीरों को देखिए चंद्रमा पर करीब 14 लाख गड्ढे हैं. 9137 से ज्यादा क्रेटर की पहचान की गई है. 1675 की तो उम्र भी पता की गई है. लेकिन वहां हजारों गड्ढे हैं. जिन्हें इंसान देख भी नहीं पाया है. क्योंकि उसके अंधेरे वाले हिस्से में देखना मुश्किल है. ऐसा नहीं है कि चांद की सतह पर मौजूद गड्ढे सिर्फ इम्पैक्ट क्रेटर हैं. कुछ ज्वालामुखी विस्फोट की वजह से भी बने हैं. करोड़ों साल पहले. सतह पर उतरते समय और LHVC लैंडर को इन गड्ढों और पत्थरों से टकराने या गिरने से बचाएंगे. इनकी तस्वीरों के आधार पर ही चंद्रयान-3 का लैंडर सतह पर उतरेगा

चंद्रयान-3 की कितनी यात्रा बाकी 

  • 14 August 2023: सुबह पौने बारह बजे से 12:04 बजे तक चौथी कक्षा बदली जाएगी.
  • 16 August 2023: सुबह 8:38 बजे से 8:39 बजे के बीच पांचवीं कक्षा बदली जाएगी. यानी सिर्फ एक मिनट के लिए इसके इंजन ऑन किए जाएंगे.
  • 17 August चंद्रयान-3 के प्रोपल्शन और लैंडर मॉड्यूल अलग होंगे. इसी दिन दोनों मॉड्यूल चंद्रमा के चारों तरफ 100 km x 100 km की गोलाकार ऑर्बिट में होंगे.
  • 18 August 2023: दोपहर पौने चार बजे से चार बजे के बीच लैंडर मॉड्यूल की डीऑर्बिटिंग होगी. यानी उसकी कक्षा की ऊंचाई में कमी लाई जाएगी.
  • 20 August 2023: चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल की रात पौने दो बजे डीऑर्बिटिंग होगी.
  • 23 August 2023: लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंड करेगा. सबकुछ सही रहेगा तो पौने छह बजे के करीब लैंडर चांद की सतह पर उतरेगा.

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Russia Luna 25 Mission: रूस ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर भेजने के लिए अपना स्पेसक्राफ्ट लूना-25 लॉन्च कर दिया है। 47 वर्षों बाद रूस का यह मिशन लॉन्च हो रहा है। भारत का चंद्रयान भी चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला है। लेकिन दोनों ही अंतरिक्ष यान पूरी तरह अलग हैं।

क्या है लूना-25 की खासियत

रूस का यह लैंडर चार टांगों वाला है। इसमें लैंडिंग रॉकेट, प्रोपेलेंट टैंक, सोलर पैनल, कंप्यूटर और चांद की मिट्टी खोदने वाली एक रोबोटिक आर्म होगा। शुरुआत में रोस्कोस्मोस और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने लूना 25 के साथ ही लूना 26, लूना 27 और मंगल ग्रह के रोवर पर एकसाथ काम करने की योजना बनाई थी। लेकिन दोनों के बीच यह पार्टनरशिप रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद खत्म हो गई।

चंद्रयान-3 में क्या है अलग

भारत का चंद्रयान 14 जुलाई को लॉन्च किया गया था। इसके भी 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की योजना है। इसी सप्ताह उसने चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश किया है। इस मिशन की खासियत की बात करें तो इसमें एक लैंडर, रोवर और एक प्रोपल्शन मॉड्यूल है। लूना 25 में रोवर नहीं है। अगर रूस का मिशन भारत से पहले लैंड हो भी जाता है, तो भी दक्षिणी ध्रुव पर रोवर चलाने वाला पहला देश भारत ही बनेगा। हालांकि लूना 25 जहां एक साल का मिशन है तो भारत का चंद्रयान सिर्फ 14 दिनों तक चांद की कक्षा में रहेगा।

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